क्या करू इस जिन्धागी से - न है सम्मान और न है अभिमान
जीना है तो येसु केलिये - मरना है तो सबके भलाई केलिये
न करो प्यार किसीसे इतना जितना कि नहीं रहे सकते हो वुस्के बगैर
हर रिस्थोंको बनावो छोटा, रहने ढो वुन्हे मिटा
लम्भा रिश्ता बनावो येसु मसीहा से वही है हमारी जीवन धाता